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जश्न-ए-आज़ादी — मेरे प्यारे वतन

जश्न-ए-आज़ादी — मेरे प्यारे वतन

By Professor Nehal Uddin Ahmad

अपनी जान, अपना दिल, निसार तुझ पे ऐ वतन,
मेरे वजूद की रग-रग में बसा है ,सिर्फ तू ऐ वतन ।
मेरे सज्दों में तू है — ये ज़मीं और ये नीला फ़लक,
मेरा सरमाया, मेरी शान, मेरी जान — ऐ वतन।

 

तेरी ख़ुशबू से महकते हैं ख्वाबों के गुलशन,
तेरे नाम से ही रोशन है दिल-ओ-जाँ और तन।
तेरे लिए ही धड़कता है ये दिल सुबह-ओ-शाम,
तू ही मंज़िल, तू ही राह — तुझ पे फ़िदा ऐ वतन।

 

तेरी मिट्टी में महकती ऋषि-मुनियों की सदाएँ,
बख़्तियार की इन्कसारी, बाबा नानक की दुआएँ।
तेरे दर पे जो झुके, वही इबादत हो, ऐ जान-ए-मन,
तेरे प्यार में ही जिए मरें — तुझ पे क़ुर्बान ऐ वतन।

 

तेरे हर ज़र्रे में गूंजे कबीर, तुलसी, रसखान,
तेरे कण-कण में बसें हैं शहीदों के बलिदान।
इस धरती पर नफ़रत नहीं, हैं यहाँ प्यार के निशान,
तेरे लिए ही दिल धड़के — तुझ पे क़ुर्बान ऐ वतन।

 

इस धरती पर खिलते हैं हर मौसम के रंग,
बरसात की रिमझिम, शरद की मधुर उमंग।
वसंत की सुगंधित बयार, गर्मी में शिद्दत भरी तपन,
हर मौसम में महके तू — ऐ मेरे प्यारे वतन।

 

न पूछ मुझसे मेरा मज़हब, मेरी ज़ात है क्या,
तेरा हूँ — हिंदुस्तानी हूँ, क्या ये कम है क्या।
दिल में तेरे लिए उमड़ते हैं हज़ारों अरमान,
मेरी पहचान है मेरा देश — मेरी संस्कृति है हिंदुस्तान।

 

तेरी शान के वास्ते देंगे हम अपनी जान,
हर दम तेरी हिफ़ाज़त में मुस्तैद -नौजवान।
जब भी ज़ुल्म का साया तेरी फ़िज़ा को घेरे,
मिटा देंगे वो साया — तुझ पे क़ुर्बान ऐ वतन।

 

तेरी मिट्टी की सौंधी ख़ुशबू में अमन का पैग़ाम,
तेरी बाहों में महफ़ूज़ हर मज़हब, हर क़ौम, हर इंसान।
तेरी आन-बान पर जो आए ज़रा-सी भी आँच,
तो दे देंगे अपनी जान — तुझ पे क़ुर्बान ऐ वतन।

 

गर दुश्मन की निगाह उठे तेरी जानिब, ऐ चमन,
तो हर सीना बनेगा दीवार-ए-फ़ौलाद, ऐ वतन।
तेरी ख़ातिर लहू का हर कतरा बहेगा, ऐ वतन,
जब तक ये दुनिया है — तेरा नाम रहेगा, ऐ वतन।

 

आओ मनाएँ जश्न-ए-आज़ादी, रंगों में डूबकर,
नफ़रत मिटा के हर इंसान को गले लगाएँ झूमकर।
तेरे लिए जीना, तेरे लिए मरना — यही हमारा इमान,
तुझमें ही मिल जाए ये मिट्टी — यही है अरमान ऐ वतन।

 

केसरिया, सफ़ेद, हरा — हमारे तिरंगे की शान,
देता है हमें रंग-बिरंगी यकजहती का पैग़ाम।
पर्वत से सागर तक लहराए यह ध्वज महान,
कश्मीर से हिंदसागर तक गूंजे — जय हिंद, ऐ वतन, ऐ वतन।

 Prof Nehaluddin Ahmad, LL.D. Professor of Law, Sultan Sharif Ali Islamic University (UNISSA), Brunei, email: ahmadnehal@yahoo.com

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